जमीन उपयोग से हेरिटेज संरक्षण तक शामिल
जल्द पब्लिक डोमेन में रखकर मांगे जाएंगे सुझाव
बिहारशरीफ (नालंदा)। शहर के सुनियोजित विकास और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे बिहारशरीफ मास्टर प्लान के ड्राफ्ट की गुरुवार को अहम समीक्षा की गई। नगर निगम सभागार में नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में योजना के हर बिंदु पर गहन मंथन किया गया।
2045 की आबादी को देखकर बना प्लान
नगर आयुक्त ने बताया कि वर्ष 2045 तक शहर की अनुमानित आबादी को ध्यान में रखकर इंफ्रास्ट्रक्चर समेत बेसिक सुविधाओं को उपलब्ध कराने समेत विकास के कई बिंदुओं पर खुलकर चर्चा की गई। इस समीक्षा बैठक में उप नगर आयुक्त शम्स रजा, नगर प्रबंधक, टाउन प्लानर एवं कंसल्टेंट टीम के पदाधिकारी मौजूद थे। सभी ने ड्राफ्ट में शामिल प्रावधानों पर अपने सुझाव दिए और जमीनी हकीकत के अनुसार जरूरी संशोधनों पर चर्चा की।

ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में रख मांगे जाएंगे सुझाव
नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने बैठक के दौरान कंसल्टेंट टीम को निर्देश दिया कि आम लोगों की आपत्तियों व सुझावों को शामिल कर ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाए। मास्टर प्लान लागू होने के बाद बिहारशरीफ का नक्शा पूरी तरह बदल जाएगा और यह शहर आधुनिक सुविधाओं से लैस स्मार्ट शहर के रूप में विकसित होगा। नगर निगम जल्द ही ड्राफ्ट को पब्लिक डोमेन में रखकर लोगों से सुझाव मांगेगा, ताकि योजना को और अधिक जनउपयोगी बनाया जा सके।
शहर के मास्टर प्लान में क्या-क्या है शामिल:
बिहारशरीफ मास्टर प्लान के अंतर्गत शहर के समग्र विकास की रूपरेखा तैयार की जा रही है। इसमें मुख्य रूप से 6 बिंदु शामिल हैं।भूमि उपयोग योजना: आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक व हरित क्षेत्रों का स्पष्ट वर्गीकरण, ताकि अवैध निर्माण पर रोक लगे और शहर का संतुलित विस्तार हो।यातायात व परिवहन: सड़कों के चौड़ीकरण, नए बाईपास, फ्लाईओवर, पार्किंग स्थल व पब्लिक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क को मजबूत करने की योजना, जिससे जाम की समस्या खत्म हो।बुनियादी सुविधा: जलापूर्ति, सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम, ठोस कचरा प्रबंधन व स्ट्रीट लाइट का आधुनिकीकरण।पर्यावरण व जल संरक्षण: तालाबों-जलस्रोतों का जीर्णोद्धार, पार्क व ग्रीन बेल्ट का विकास, प्रदूषण नियंत्रण के उपाय।सामाजिक अवसंरचना: स्कूल, अस्पताल, खेल मैदान, सामुदायिक केंद्र व बाजार क्षेत्रों का सुनियोजित विकास। हेरिटेज व पर्यटन: ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कनेक्टिविटी व सुविधाओं का विकास।









