स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बायोमेट्रिक व्यवस्था नहीं
पंजी के आधार पर वेतन भुगतान करने की मांग
बिहारशरीफ (नालंदा). बिहार चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ, नालंदा के शिष्टमंडल ने मंगलवार को सिविल सर्जन डॉ. जय प्रकाश सिंह के माध्यम से सचिव, स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार, पटना को 25 सूत्री मांग पत्र सौंपा. सिविल सर्जन ने मांगपत्र प्राप्त कर उसे विभागीय कार्रवाई के लिए पटना भेजने का आश्वासन दिया. संघ के नेताओं ने कहा कि स्वास्थ्य कर्मी कोरोना काल से लेकर आज तक जनता की सेवा में निरंतर लगे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है. इस अवसर पर शिष्टमंडल में अमरेन्द्र कुमार, अमरजीत कुमार, रंजन कुमार, विष्णुकांत, अनुपमा कुमारी, नीलम कुमारी, रेणु कुमारी, निर्मला कुमारी सिन्हा, अवंति कुमारी, अनीता कुमारी, सुलेखा सिन्हा, गीता कुमारी, ललिता कुमारी, प्रनीता कुमारी सहित प्रखंड, अनुमंडल एवं जिला शाखा के पदाधिकारी उपस्थित थे.

बायोमेट्रिक हाजरी अव्यवहारिक : संघ
संघ के जिला मंत्री संजय कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आपातकालीन 24×7 सेवा देने वाला विभाग है. स्वास्थ्य उपकेंद्रों में कार्यरत महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को टीकाकरण, जच्चा-बच्चा सुरक्षा, यक्ष्मा-फाइलेरिया की दवा वितरण, पल्स पोलियो अभियान और आम जनता को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए रोज 8 से 10 किलोमीटर तक जाना पड़ता है. ऐसी स्थिति में पंचायत सरकार भवन जाकर बायोमेट्रिक हाजरी बनाना व्यावहारिक नहीं है. संघ ने मांग की कि जब तक स्वास्थ्य उपकेंद्रों में बायोमेट्रिक की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक कर्मियों द्वारा उपस्थिति पंजी में दर्ज हाजरी के आधार पर ही वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाए.
25 सूत्री मांगों में प्रोन्नति और नियमितीकरण प्रमुख
संघ के संघर्ष मंत्री रितेश कुमार और कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार ने बताया कि मांगपत्र में कुल 25 मांगें शामिल हैं. इनमें प्रमुख मांगों में सभी पदों के अनुसार प्रोन्नति एवं नियमितीकरण है जबकि अन्य मांगों में सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों को राज्य संवर्ग के कर्मियों को मातृत्व अवकाश, एमएसीपी, स्वच्छता प्रमाण पत्र एवं अन्य अवकाश निदेशालय के बजाय पहले की तरह सिविल सर्जन, अधीक्षक और प्राचार्य के स्तर से ही स्वीकृत करने, संविदा कर्मियों की सेवा को नियमित किया जाए एवं अन्य लंबित भत्ते और सुविधाओं का शीघ्र निष्पादन करना शामिल है.









