अरवल के मत्स्य कृषकों का मोहनपुर हैचरी में भ्रमण
गोबर-भोजन के उपयोग से भी बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन
रणजीत,बिहारशरीफ (नालंदा)। मत्स्य प्रसार राज्य योजना के तहत गुरुवार को अरवल जिले के 60 मत्स्य कृषकों ने नालंदा के मोहनपुर मत्स्य हैचरी का एक दिवसीय भ्रमण किया। यह भ्रमण अरवल के जिला मत्स्य पदाधिकारी-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के निर्देश पर आयोजित किया गया। मत्स्य विकास पदाधिकारी श्रीराम कुमार और मत्स्य प्रसार पदाधिकारी श्वेता कुमारी के नेतृत्व में पहुंचे कृषकों को हैचरी में आधुनिक मत्स्य पालन तकनीक, हैचरी संचालन और उत्पादन बढ़ाने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कम लागत में अधिक उत्पादन का मिला फॉर्मूला :
मोहनपुर मत्स्य हैचरी के संचालक शिवनन्दन प्रसाद उर्फ शिवजी ने कृषकों को हैचरी की कार्यप्रणाली और मत्स्य पालन की बारीकियां समझाईं। उन्होंने बताया कि आज मत्स्य उत्पादन के लिए कई आधुनिक और व्यावहारिक विधियां अपनाई जा रही हैं। शिवनंदन प्रसाद ने कहा कि मछलियों के निर्धारित दाने के साथ-साथ गोबर की खाद और घर-होटलों के बचे हुए भोजन का उचित उपयोग कर भी उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। इससे किसान कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकेंगे। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीक और बेहतर प्रबंधन अपनाकर मत्स्य पालक अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं।
नीली क्रांति की ओर बढ़ रहा है नालंदा :
शिवनन्दन प्रसाद ने बताया कि नालंदा में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में लगातार सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं। जिला धीरे-धीरे मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और यह क्षेत्र नीली क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहा है। पदाधिकारियों ने कहा कि इस तरह के भ्रमण से कृषकों को सीधी व्यावहारिक जानकारी मिलती है। मौके पर मंडल कुमार, अनीता देवी, बसंती कुमारी, उदय कुमार, गुड़िया देवी सहित बड़ी संख्या में कृषक मौजूद थे।









