बिहारशरीफ, राजगीर व हिलसा अस्पताल में सिर्फ इमरजेंसी चालू
जांच काउंटरों पर पसरा सन्नाटा, उपाधीक्षक बोलें- सुरक्षा नहीं तो इलाज कैसे
बिहारशरीफ (नालंदा)। अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन से दुर्व्यवहार के विरोध में बुधवार को स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर नालंदा जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बिहारशरीफ मॉडल सदर अस्पताल, राजगीर व हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल में ओपीडी सेवाएं पूरी तरह ठप रहीं। वैकल्पिक व्यवस्था न होने से 950 से अधिक मरीजों को बिना इलाज कराए ही घर लौटना पड़ा। मजबूरी में दर्जनों मरीज निजी क्लिनिक की ओर रुख करने को विवश दिखे।
जांच काउंटर खुले, पर पर्ची बिना सब सन्नाटा
हड़ताल के कारण दवा काउंटर, एक्स-रे, पैथोलॉजी, अल्ट्रासाउंड, ईसीजी समेत सभी जांच केंद्र तो खुले रहे, लेकिन ओपीडी बंद होने से वहां सन्नाटा पसरा रहा। डॉक्टर की पर्ची न मिलने से मरीजों की जांच भी नहीं हो सकी।
दूर-दराज से आए मरीजों का दर्द
इस्लामपुर से अजय कुमार, कालू पंडित और पिंकी देवी, जमुआरा भीखन टोला से रामप्रवेश रविदास, परबलपुर से पप्पू कुमार और सिलाव से रंजय कुमार जैसे दर्जनों मरीज सर्दी-खांसी, बदन दर्द, कमजोरी का इलाज कराने पहुंचे थे। अस्पताल पहुंचने पर पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। मजबूरी में सभी को खाली हाथ लौटना पड़ा।
सिर्फ इमरजेंसी सेवा रही चालू
संघ के निर्देशानुसार तीनों अस्पतालों में आपातकालीन सेवाएं सुचारू रहीं, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में बाधा न आए। सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने कहा कि जब डॉक्टर और सिविल सर्जन ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो आम लोगों का इलाज कैसे होगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में हमेशा लॉ एंड ऑर्डर की समस्या रहती है। ऐसी स्थिति में यहां पुलिस पिकेट बनाने की जरूरत है। जिला प्रशासन और सरकार से चिकित्सकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।आमतौर पर सदर अस्पताल में रोज 550 से अधिक मरीज ओपीडी सेवा लेते हैं। अचानक हड़ताल से दूर-दराज के मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी।









